उत्तराखंड में अवैध अतिक्रमण, खासकर सरकारी जमीन पर बने धार्मिक ढांचों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद जिला स्तर पर अधिकारी सख्ती से अभियान चला रहे हैं। इसी कड़ी में ऊधमसिंह नगर जिले के गूलरभोज–दिनेशपुर क्षेत्र में सिंचाई विभाग की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।
शनिवार सुबह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने अवैध रूप से निर्मित तीन धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान इलाके में हलचल रही, लेकिन प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के तहत और निर्धारित नियमों का पालन करते हुए की गई।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन ढांचों के निर्माण के लिए कोई वैध अनुमति नहीं ली गई थी और न ही संबंधित लोगों के पास जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज मौजूद थे। लगभग तीन महीने पहले कराए गए सर्वे में इन अवैध निर्माणों की पहचान हुई थी। इसके बाद कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर आवश्यक कागजात पेश करने को कहा गया, लेकिन निर्धारित समय के भीतर वे ऐसा करने में असफल रहे।
ठंडा नाला क्षेत्र में भी इसी तरह के अतिक्रमण के मामले सामने आए थे, जहां कुछ लोगों ने न्यायालय का रुख किया। हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और कुछ मामलों में अस्थायी स्थगन आदेश प्राप्त किया। हालांकि, जिन संरचनाओं को हटाया गया, वे किसी भी अदालत के स्थगन आदेश के दायरे में नहीं थीं, जिससे प्रशासन को कार्रवाई करने में कोई बाधा नहीं आई।
जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी जहां कहीं अवैध कब्जा पाया जाएगा, वहां बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई जारी रहेगी।
अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने बताया कि कुल तीन अवैध धार्मिक संरचनाओं को हटाकर भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई और इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था तैनात रही।
प्रशासन की इस कार्रवाई को कानून व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहने के संकेत दिए गए हैं।


