उत्तराखंड में वन्यजीवों के हमलों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन लोग जंगली जानवरों के हमलों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन वन विभाग अभी तक इस गंभीर समस्या को नियंत्रित करने में नाकाम साबित हुआ है। ताजा घटना पौड़ी जिले के लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र की है, जहां एक बाघ ने एक महिला पर हमला कर उसकी जान ले ली। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक दिलीप रावत पीड़ित परिवार से मिलने गांव पहुंचे और उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने बताया कि यह घटना सिर्फ एक isolated मामला नहीं है, बल्कि क्षेत्र में बाघ के लगातार हमलों की कड़ी है।
पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान विधायक दिलीप रावत ने वन विभाग और सरकार की बेरुखी पर कड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी आवाज अनसुनी रही और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वह इस्तीफा देने तक का निर्णय ले सकते हैं।
विधायक ने यह भी कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वहां पुल तो बना दिया गया है, लेकिन उसे जोड़ने वाली सड़क आज तक पूरी नहीं हुई। सड़क निर्माण न होने के कारण ग्रामीण जंगल के रास्तों से होकर गुजरने को मजबूर हैं, जिससे जंगली जानवरों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
दिलीप रावत ने बताया कि पिछले 11 साल से वे सड़क निर्माण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। क्षेत्र में बाघ के हमलों की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया जा चुका है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस निर्णय नहीं निकला है।
स्थानीय लोग सुरक्षा की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे जंगल पार करने में डर का अनुभव कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बाघ को पकड़ने या नियंत्रण में लाने जैसी निर्णायक कार्रवाई नहीं की जाती और सड़क निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक सुरक्षा की स्थिति में कोई सुधार संभव नहीं है।


