उत्तराखंड में लगातार दूसरे वर्ष भी शिक्षकों के अनिवार्य तबादले नहीं किए जाएंगे। राज्य सरकार ने इस बार केवल अनुरोध के आधार पर तबादलों को मंजूरी दी है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिश पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सहमति दे दी है।
प्रदेश में तबादला प्रक्रिया जारी है, लेकिन तबादला एक्ट के तहत निर्धारित समयसीमा के बावजूद शिक्षकों और कर्मचारियों से अनुरोध आधारित तबादलों के लिए आवेदन नहीं मांगे जा सके हैं। हालांकि, एक्ट की धारा 27 के अंतर्गत कई शिक्षकों ने पहले ही तबादले के लिए आवेदन प्रस्तुत किए हैं।
इन आवेदनों पर अंतिम निर्णय को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हाल ही में इस विषय पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक भी आयोजित की गई थी। सचिव कार्मिक शैलेश बगौली ने बताया कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण इस वर्ष दुर्गम से सुगम और सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में अनिवार्य तबादले नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अनुरोध आधारित तबादलों के संबंध में जल्द ही आदेश जारी किए जाएंगे।
अब तक राज्य सरकार शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादलों के लिए एक निश्चित सीमा निर्धारित करती रही है, जो अलग-अलग वर्षों में 10 से 15 प्रतिशत तक रही। लेकिन इस बार ऐसी कोई सीमा तय नहीं की गई है। सचिव कार्मिक के अनुसार पात्र कर्मचारियों और शिक्षकों के रिक्त पदों पर आवश्यकतानुसार अनिवार्य और अनुरोध आधारित तबादले किए जाएंगे।


