उत्तराखंड हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया से जुड़े एक मामले में अदालत के आदेश का पालन नहीं करने पर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के मुख्य अभियंता संजय कुमार पाठक को कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराया है।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अधिकारियों ने जानबूझकर अदालत के आदेश की अनदेखी की। कोर्ट ने कहा कि बाद की परिस्थितियों का हवाला देकर न्यायिक आदेशों को निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता।
मामला उत्तरकाशी से जुड़ी एक निविदा प्रक्रिया का है, जिसमें मेसर्स राम कृष्ण जयरा को तकनीकी मूल्यांकन के दौरान अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके खिलाफ फर्म ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के बाद 26 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभाग को निर्देश दिया था कि फर्म की वित्तीय बोली को शामिल कर नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए।
हालांकि, कोर्ट के आदेश के बावजूद विभाग ने वित्तीय बोली खोलने के बजाय पूरी टेंडर प्रक्रिया रोक दी। विभाग ने तर्क दिया कि अन्य बोलीदाताओं ने निविदा की वैधता अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है और अब केवल एक ही बोलीदाता बचा है, इसलिए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यह स्थिति विभाग की अपनी कार्रवाई के कारण बनी है। अदालत ने माना कि आदेश को प्रभावहीन बनाने के लिए परिस्थितियों का सहारा लिया गया।
कोर्ट ने पीएमजीएसवाई के मुख्य अभियंता संजय कुमार पाठक समेत अन्य अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे 26 फरवरी 2026 के आदेश का 10 दिनों के भीतर पालन करें और अगली सुनवाई में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें। अदालत ने चेतावनी दी है कि आदेश का पालन नहीं होने पर मुख्य अभियंता को 27 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर सजा की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।


