उत्तराखंड में तबादला एक्ट के तहत सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नियमों के अनुसार 31 मार्च तक विभागाध्यक्षों को मानकों के आधार पर कार्यस्थलों का चिह्नीकरण करना है। हालांकि प्रदेश के सबसे बड़े विभाग, शिक्षा विभाग में इस वर्ष शिक्षकों के तबादले होने की संभावना कम नजर आ रही है।
तबादला एक्ट के प्रावधानों के तहत हर साल एक अप्रैल तक मंडल और जिला स्तर पर स्थानांतरण समितियों का गठन किया जाना अनिवार्य है। इसके बाद 15 अप्रैल तक प्रत्येक संवर्ग के लिए सुगम और दुर्गम क्षेत्रों के कार्यस्थलों, स्थानांतरण के लिए पात्र कर्मचारियों और शिक्षकों के साथ-साथ खाली पदों की सूची विभागीय वेबसाइट पर जारी की जानी होती है।
कुछ विभागों का कहना है कि शासन स्तर से आदेश जारी होने के बाद ही तबादलों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं शिक्षा विभाग में सुगम और दुर्गम क्षेत्रों के निर्धारण का मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। इसी वजह से इस साल भी शिक्षकों के तबादले अटक सकते हैं।
शिक्षा सचिव रविनाथ रामन ने बताया कि शिक्षकों के तबादलों पर फिलहाल कोर्ट की रोक लगी हुई है, जिसके कारण सुगम और दुर्गम क्षेत्र के आधार पर स्थानांतरण संभव नहीं है। हालांकि धारा 27 के तहत बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के 250 शिक्षकों के तबादले के लिए प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेजा गया है।
वहीं कार्मिक सचिव शैलेश बगोली ने कहा कि तबादला एक्ट के तहत हर वर्ष होने वाले स्थानांतरण के लिए पहले से समय-सारणी तय है। इसलिए सभी विभागों को अलग से शासनादेश का इंतजार किए बिना तय समय-सीमा के अनुसार तबादला प्रक्रिया को लागू करना चाहिए।


