उत्तराखंड हाईकोर्ट ने किच्छा की सिरौली कलां नगर पालिका में अब तक चुनाव नहीं कराए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका समेत अन्य संबंधित मामलों पर एक साथ सुनवाई की। नैनीताल हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग के सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए।
सुनवाई में चुनाव आयोग की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर कहा गया कि आयोग चुनाव कराने में सक्षम है, लेकिन कुछ समस्याओं के चलते प्रक्रिया बाधित हो रही है। हालांकि, कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आई।
इस दौरान हाल ही में कोर्ट में पेश की गई एक वीडियो क्लिप भी देखी गई, जिसमें विपक्ष की ओर से कथित तौर पर कहा गया था कि “केस वापस ले लो, न्यायालय में तारीख पर तारीख मिलती है।” इस पर न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताई।
न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में हर सप्ताह नियमित सुनवाई की जा रही है, इसके बावजूद अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा, “यह न्यायालय है, कोई फिल्म नहीं।”
एकलपीठ में सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने कहा कि अदालत सभी पक्षों को सुनने के बाद ही फैसला देगी। न्यायालय सभी के लिए खुला है और किसी भी व्यक्ति को अदालत में अपनी बात रखने से रोका नहीं जा सकता।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया है कि वर्ष 2018 में किच्छा नगर पालिका का विस्तार किया गया था, जिसमें सिरौली कलां, बंडिया, देवरिया और आजाद नगर को शामिल किया गया। उसी वर्ष हुए निकाय चुनाव में सिरौली कलां क्षेत्र को वार्ड 18, 19 और 20 में शामिल किया गया था। बाद में कुछ हिस्सों को हटाया गया, लेकिन कोर्ट के आदेश पर दोबारा शामिल कर लिया गया।
याचिका में कहा गया है कि सिरौली कलां पिछले छह वर्षों से नगर पालिका क्षेत्र का हिस्सा है और यहां करीब पांच करोड़ रुपये के विकास कार्य भी हो चुके हैं। इसके बावजूद अब इस क्षेत्र को नगर पालिका से अलग करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि सिरौली कलां को नगर पालिका में ही बनाए रखा जाए और अन्य नगर निकायों की तरह यहां भी समय पर चुनाव कराए जाएं। उनका कहना है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी प्रशासक के भरोसे पालिका चल रही है, जिससे कई विकास और जनसुविधा से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं।


