किशोरी से दुराचार के मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। मामले में गैंगरेप जैसी गंभीर धाराओं को तत्कालीन दरोगा ने महज छह पंक्तियों की रिपोर्ट में निपटा दिया, जिससे लापरवाही और तथ्यों को छिपाने के आरोप लगे हैं।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में किशोरी से दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने गुरुवार को मुख्य आरोपी यूट्यूबर शिवबरन यादव को जेल भेज दिया है, जबकि मामले में नामजद दरोगा अमित मौर्य फरार है। उसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें अलग-अलग जिलों में दबिश दे रही हैं। किशोरी की मेडिकल जांच में ऐसे अहम साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर डॉक्टरों ने दुष्कर्म की आशंका से इनकार नहीं किया है। इसके बाद मामले में गैंगरेप की धारा भी जोड़ दी गई है।
जांच में सामने आया है कि सचेंडी थाने के निलंबित थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने शुरुआती रिपोर्ट में घटना को तोड़-मरोड़कर पेश किया। उन्होंने एफआईआर में केवल छह पंक्तियों में घटनाक्रम दर्ज कर कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया। बाद में मामले की जांच एडीसीपी कपिल देव सिंह को सौंपी गई, जिनकी रिपोर्ट के आधार पर धाराएं बढ़ाई गईं।
पीड़िता सचेंडी क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी है। आरोप है कि यूट्यूबर शिवबरन यादव उसे जबरन स्कॉर्पियो में बैठाकर झांसी रेलवे लाइन के किनारे ले गया और वहां दुष्कर्म किया। शुरुआती बयान में किशोरी ने शिवबरन पर ही आरोप लगाया था, लेकिन आगे की जांच में अन्य तथ्यों का खुलासा हुआ।
गुरुवार सुबह किशोरी अपने कलमबंद बयान दर्ज कराने कोर्ट पहुंची, लेकिन बयान दर्ज नहीं हो सका। इसको लेकर किशोरी के भाई ने पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि जानबूझकर बयान दर्ज नहीं कराया जा रहा है।
मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टरों ने यौन हमले की आशंका जताई है। स्वैब जांच के लिए नमूने फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं। साथ ही किशोरी की उम्र प्रमाणित करने के लिए सीएमओ को पत्र भेजा गया है।
मामले में आरोपी दरोगा अमित मौर्य की लोकेशन प्रयागराज में मिलने के बाद पुलिस की दो टीमें वहां भेजी गई हैं, जबकि एक टीम वाराणसी भी रवाना की गई है। इससे पहले क्राइम ब्रांच ने लखनऊ में भी कई जगहों पर दबिश दी थी। कमिश्नरी पुलिस ने पूरे मामले की रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि दरोगा अमित मौर्य ने करीब दो माह पहले स्कॉर्पियो खरीदी थी। आरोप है कि वह पहले भी तेल चोरी और जुए के नेटवर्क से जुड़े लोगों से संबंध रखने के आरोपों में घिर चुका है।
आरोपी शिवबरन ने पुलिस को दिए नौ मिनट के बयान में दरोगा अमित मौर्य के साथ-साथ आरपीएफ के एक इंस्पेक्टर की मौजूदगी का भी दावा किया है। हालांकि पुलिस ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह आरपीएफ अधिकारी कौन है। इसे लेकर पुलिस पर तीसरे व्यक्ति को बचाने के आरोप लग रहे हैं।
जेल भेजे जाते समय शिवबरन यादव ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। उसका दावा है कि वह किशोरी को नहीं जानता और निष्पक्ष जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।
वहीं किशोरी और उसके परिजनों का आरोप है कि पुलिस दरोगा को बचाने की कोशिश कर रही है। किशोरी ने बताया कि वह घर जाना चाहती है और पिछले दो दिनों से परेशान है। भाई ने कहा कि उनकी मां नहीं है और पिता विकलांग हैं। परिवार पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है और धमकियां भी मिल रही हैं।


