कानपुर की प्रज्ञा सिंह शादी के महज तीन महीने बाद अपने पति मनीष के साथ केदारनाथ यात्रा पूरी कर देहरादून से गाजियाबाद लौट रही थीं। दोनों नंदा देवी एक्सप्रेस ट्रेन में सफर कर रहे थे, लेकिन इसी यात्रा के दौरान एक ऐसी घटना हुई जिसने सभी को हैरान कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, हरिद्वार तक पति-पत्नी के बीच बातचीत सामान्य थी और फिर दोनों सो गए। जब ट्रेन मुजफ्फरनगर के पास पहुंची तो मनीष की नींद खुली और उन्होंने पाया कि प्रज्ञा अपनी सीट पर नहीं थीं। शुरुआत में उन्हें लगा कि वह वॉशरूम गई होंगी, लेकिन काफी देर तक वापस न आने पर उन्होंने पूरी बोगी में तलाश शुरू की। ट्रेन के हर कोच और वॉशरूम में खोजबीन के बावजूद प्रज्ञा का कोई पता नहीं चला, और उनका मोबाइल भी बंद था।
घबराए पति ने अगले स्टेशन पर भी उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद मामले की सूचना रेलवे पुलिस को दी गई और रुड़की कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। पुलिस ने शक के आधार पर जांच शुरू करते हुए रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, लेकिन कई जगह कैमरे खराब होने के कारण जांच में दिक्कतें आईं। इसके अलावा रेलवे ट्रैक और आसपास के इलाकों में भी सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
करीब छह दिन बाद मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब प्रज्ञा बिहार के बेगूसराय में सुरक्षित मिलीं। पुलिस ने उन्हें बरामद कर परिजनों को सूचना दी। पूछताछ में सामने आया कि ट्रेन में पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान पति के सो जाने पर प्रज्ञा चुपचाप ट्रेन से उतर गईं और गलती से दूसरी ट्रेन में सवार होकर बिहार पहुंच गईं।
प्रज्ञा ने बताया कि उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि वह जिस ट्रेन में चढ़ी हैं, वह बिहार जा रही है। वहां पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी मां से संपर्क कर अपनी सुरक्षित होने की जानकारी दी। पुलिस ने पुष्टि की कि वह पूरी तरह सुरक्षित हैं और बाद में उन्हें उनके परिवार के पास कानपुर भेज दिया गया। इस पूरे मामले में किसी आपराधिक घटना की आशंका नहीं पाई गई और मामला शांत हो गया।


