उत्तराखंड में *नारी शक्ति वंदन अधिनियम* को लेकर सियासत तेज हो गई है। इसी मुद्दे पर राज्य विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया गया, जहां जोरदार बहस और हंगामा देखने को मिला। इस दौरान बीजेपी विधायक अरविंद पांडेय ने एक विवादित बयान देकर चर्चा को और भड़का दिया।
दरअसल, हाल ही में लोकसभा में नरेंद्र मोदी की सरकार महिला आरक्षण से जुड़े नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026 को पारित नहीं करा सकी। इसके लिए बीजेपी ने विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। इसी पृष्ठभूमि में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया, जिसमें मुख्यमंत्री समेत कई मंत्रियों और विधायकों ने अपने विचार रखे।
सत्र के दौरान बीजेपी ने कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। इसी बहस के बीच अरविंद पांडेय ने महिलाओं को लेकर एक आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा कि “हमारी संस्कृति में कहीं न कहीं महिलाओं का स्वभाव चोरी का होता है, जिसे बचत भी कहा जा सकता है।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर उनका बयान गलत माना जाए तो वे माफी मांगने को तैयार हैं।
पांडेय ने आगे कहा कि महिलाएं अक्सर अपने पति की जेब से पैसे निकालती हैं, जिसे वे “चोरी” मानते हैं। उनके मुताबिक, महिलाएं इन पैसों से गहने बनवाती हैं, लेकिन जब परिवार पर संकट आता है तो वही गहने बेचकर परिवार को आर्थिक मदद भी देती हैं। उन्होंने दावा किया कि इस सामाजिक व्यवहार को समझते हुए ही सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आई है।
इसके अलावा, पांडेय ने कांग्रेस से अपील की कि वह केंद्र में हुई अपनी “गलती” को सुधारे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कांग्रेस को प्रस्ताव भेजकर अपनी पार्टी को महिला आरक्षण पर समर्थन देने के लिए प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि गंगा की शुरुआत उत्तराखंड से होती है और यहां से सकारात्मक संदेश जाना चाहिए।


