उत्तराखंड में लोकतंत्र की सबसे अहम कड़ी मानी जाने वाली मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वर्षों से चली आ रही मतदाता सूची की गहन जांच में उम्र, पारिवारिक विवरण और पहचान संबंधी बड़ी संख्या में ऐसी विसंगतियां मिली हैं, जिन्होंने निर्वाचन अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है।
जांच के दौरान देहरादून जिले में 28,637 ऐसे मतदाता मिले, जिनकी उम्र और उनके माता-पिता की उम्र के बीच 15 वर्ष से भी कम का अंतर दर्ज है। वहीं 16,351 मामलों में माता-पिता और संतान की उम्र में 50 वर्ष से अधिक का अंतर पाया गया। इसके अलावा 13,527 मतदाताओं के रिकॉर्ड में दादा-दादी या नाना-नानी और मतदाता की उम्र के बीच 40 वर्ष से भी कम का अंतर दर्ज मिला। अधिकारियों के अनुसार ये आंकड़े संकेत देते हैं कि वर्षों तक मतदाता सूची में दर्ज कई रिकॉर्ड का समुचित सत्यापन नहीं किया गया।
विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद देहरादून जिले की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव भी देखने को मिला है। पहले जिले में 13,76,813 मतदाता दर्ज थे, लेकिन सत्यापन के बाद 1,86,008 नाम सूची से हटा दिए गए, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 11,90,805 रह गई। हटाए गए नामों में 18,538 मृतक मतदाता, 50,287 सत्यापन के दौरान अनुपस्थित मिले मतदाता, 1,00,477 दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके मतदाता, 2,585 ऐसे लोग शामिल हैं जिन्होंने कहीं और अपना नाम दर्ज कराया था, जबकि 14,121 नाम अन्य कारणों से हटाए गए।
एसआईआर के दौरान केवल उम्र संबंधी ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और पहचान संबंधी कई अन्य विसंगतियां भी सामने आईं। जांच में 24,741 ऐसे मामले मिले, जहां एक ही व्यक्ति के नाम से छह से अधिक मतदाता जुड़े हुए पाए गए। वहीं 32,419 मामलों में परिवार के मुखिया और मतदाता की उम्र के बीच नौ महीने से भी कम का अंतर दर्ज मिला। इसके अलावा 1,71,212 मतदाताओं के नामों में विभिन्न प्रकार की त्रुटियां पाई गईं, जबकि 1,52,270 मतदाताओं ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची से अपनी मैपिंग तक नहीं कराई थी। सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि जिले के 3,95,868 मतदाता रिकॉर्ड किसी न किसी प्रकार की त्रुटि या विसंगति से प्रभावित पाए गए।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान ने मृतक, स्थानांतरित और अपात्र मतदाताओं की पहचान करने के साथ-साथ मतदाता सूची में वर्षों से चली आ रही डेटा एंट्री, पारिवारिक विवरण और उम्र संबंधी गंभीर खामियों को भी उजागर किया है। विभाग ने पात्र नागरिकों से अपील की है कि वे 13 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराकर अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं और रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों का भी सुधार करा सकते हैं।


