उत्तराखंड में शिक्षकों के तबादलों को लेकर शासन ने आंशिक मंजूरी दी है। गंभीर बीमारी, दिव्यांगता और विशेष पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर होने वाले तबादलों को स्थानांतरण समिति के स्तर से निपटाने की अनुमति मिल गई है। हालांकि अनुरोध के आधार पर दुर्गम से दुर्गम तथा सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में किए जाने वाले तबादलों पर अभी फैसला नहीं हो सका है।
शासन ने इन लंबित प्रस्तावों को कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को पुनर्विचार के लिए भेज दिया है। इस कारण बड़ी संख्या में शिक्षक तबादलों के इंतजार में बने हुए हैं।
जारी आदेश के अनुसार, स्थानांतरण अधिनियम की धारा 27 के तहत गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, बीमार बच्चों, विधवा, विधुर, तलाकशुदा, परित्यक्ता, आपदा प्रभावित और माता-पिता की गंभीर बीमारी जैसी श्रेणियों में आने वाले मामलों पर स्थानांतरण समितियां निर्णय लेंगी। इसमें गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के प्रधानाचार्य, प्रवक्ता और एलटी शिक्षकों के प्रस्ताव शामिल हैं।
वहीं, अनुरोध आधारित तबादलों को लेकर अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इन मामलों में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की राय के बाद ही अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे। तबादला प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित है, लेकिन शिक्षा विभाग के अनुसार तय समय में सभी प्रक्रियाएं पूरी करना मुश्किल है। विभाग ने शासन से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया है।
इस बीच तबादला प्रक्रिया पर निर्वाचन आयोग की अनुमति भी अभी प्राप्त नहीं हुई है। राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य जारी होने के कारण आयोग ने स्पष्ट किया है कि इससे जुड़े कार्यों में लगे अधिकारियों के तबादले बिना पूर्व अनुमति संभव नहीं होंगे।शिक्षा सचिव रविनाथ रामन ने बताया कि स्थानांतरण समितियों को भेजे गए प्रस्ताव पिछले वर्षों के लंबित मामले हैं। इनके साथ नए आवेदन भी लिए जाएंगे और पूरी प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय की मांग की जाएगी।


