उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा चंपावत जिले में स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई सोलर प्लांट स्थापना की घोषणा अब संकट में घिरती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना का क्रियान्वयन उरेडा (UREDA) की ओर से बजट स्वीकृति में देरी के कारण अधर में लटक गया है, जिससे लाभार्थी महिलाएं आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने चंपावत दौरे के दौरान मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत स्वरोजगार से जुड़ी महिलाओं को सोलर प्लांट स्थापित करने का लाभ देने की घोषणा की थी। इस संबंध में जानकारी उनके आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी साझा की गई थी। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और सौर ऊर्जा के माध्यम से आय के नए स्रोत उपलब्ध कराना था।
परियोजना के तहत चंपावत के गड़कोट, भगिना और लाडोन गांवों में सोलर प्लांट स्थापित किए गए। लेकिन प्लांट से उत्पादित बिजली को ग्रिड से जोड़ने के लिए पोल और विद्युत लाइन बिछाने का कार्य अधूरा रह गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) को आवश्यक धनराशि स्वीकृत (सेंशन) नहीं की, जिसके कारण कार्य बीच में ही रुक गया।
इस संबंध में जब उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के अधिकारियों से बातचीत की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अब तक उरेडा की ओर से कार्य के लिए धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही भुगतान प्राप्त होगा, बिजली लाइन बिछाने का शेष कार्य तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।
परियोजना से जुड़ी महिलाओं और अन्य लाभार्थियों ने बैंकों से करोड़ों रुपये का ऋण लेकर सोलर प्लांट लगाए हैं। लेकिन ग्रिड से कनेक्शन न मिलने के कारण बिजली उत्पादन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन, आय का कोई स्रोत शुरू नहीं हो पाया, जबकि हर महीने लाखों रुपये की बैंक ईएमआई का भुगतान करना पड़ रहा है।
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि उन्होंने सरकार की घोषणा और प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा कर कर्ज लिया, लेकिन अब वे कर्ज के बोझ तले दबती जा रही हैं। कुछ परिवारों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि उन्हें अन्य संपत्तियां गिरवी रखने की नौबत आ गई है।
ग्रामीणों और लाभार्थियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। लोगों का आरोप है कि विभागीय समन्वय की कमी और लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।


