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महंगा भी, कम भी!… उत्तराखंड में पेट्रोल-डीजल संकट ने बढ़ाई चिंता

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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब उत्तराखंड में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। राज्य के कई हिस्सों में ईंधन संकट गहराता जा रहा है और हालात ऐसे बन गए हैं कि कई पेट्रोल पंपों पर सिर्फ एक दिन का स्टॉक बचा होने की बात कही जा रही है। यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंप संचालकों को उधार पर ईंधन देना बंद कर दिया है। अब एडवांस भुगतान के बाद ही पेट्रोल और डीजल की सप्लाई की जा रही है। जबकि एक माह पहले तक कंपनियां पांच दिन तक का ईंधन उधार उपलब्ध कराती थीं। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर छोटे और निजी पेट्रोल पंपों पर पड़ा है।

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इसी बीच शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी कर दी गई। पेट्रोल के दाम में 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.11 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। नई कीमतें लागू होने के बाद कई बड़े शहरों में ईंधन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

नियमों में बदलाव के कारण बड़े पेट्रोल पंपों पर केवल दो से तीन दिन का स्टॉक बचा है, जबकि छोटे पंप लगभग खाली हो चुके हैं। हल्द्वानी के प्रमुख पेट्रोल पंपों में सामान्य पेट्रोल खत्म हो गया है और फिलहाल केवल स्पीड पेट्रोल ही उपलब्ध है। इससे वाहन चालकों पर प्रति लीटर करीब 8 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। डीएम आवास के सामने स्थित हरबंस पेट्रोल पंप पर भी सामान्य पेट्रोल समाप्त हो चुका है। अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में भी ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है। अल्मोड़ा में गुरुवार शाम तक पांच में से चार पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म हो गया था, जबकि बागेश्वर के दो पंपों पर पेट्रोल उपलब्ध नहीं रहा। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन फिलहाल चरम पर है। ऐसे में वीकेंड के दौरान ईंधन की मांग और बढ़ सकती है, जिससे व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

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पूर्ति विभाग के अनुसार राज्य में 900 से अधिक पेट्रोल पंप संचालित हैं और रोजाना लगभग 45 लाख लीटर पेट्रोल तथा 27 लाख लीटर डीजल की खपत होती है। अपर आयुक्त खाद्य पीएस पांगती ने कहा कि तेल कंपनियां पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन कार्य करती हैं और राज्य में पर्याप्त पेट्रोल पंप मौजूद हैं। कुछ स्थानों पर आई दिक्कतों से पूरी व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी। विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

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वहीं पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष मित्तल ने बताया कि पहले तेल कंपनियां करीब 40 लाख रुपये तक का पेट्रोल और डीजल उधार उपलब्ध कराती थीं, जिसका भुगतान चार दिन के भीतर करना होता था। अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल देहरादून के बड़े पंपों के पास करीब तीन दिन का स्टॉक बचा है। एक पेट्रोल पंप की भंडारण क्षमता 50 हजार से लेकर एक लाख लीटर तक होती है। एडवांस भुगतान की व्यवस्था लागू होने के कारण पंप संचालकों को आपूर्ति संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल संकट और गहरा सकता है।

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हिल दर्पण डेस्क

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