हल्द्वानी में हर वर्ष बरसात के दौरान होने वाली जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन ने व्यापक योजना को आगे बढ़ा दिया है। कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सिंचाई विभाग द्वारा तैयार 430 करोड़ रुपये की ड्रेनेज योजना (डीपीआर) को समीक्षा के बाद समिति ने संस्तुति प्रदान कर दी है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा।
कैंप कार्यालय हल्द्वानी में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में शहर के समग्र जल निकासी तंत्र (ड्रेनेज नेटवर्क) को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। आयुक्त दीपक रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर के प्रमुख नालों—कलसिया, चीनपुर, पनियाली, वनचौकी, रकसिया और देवखड़ी—के आसपास हुए अतिक्रमणों को तत्काल चिन्हित कर हटाया जाए, ताकि जल निकासी व्यवस्था बाधित न हो।
उन्होंने वर्षाकाल के दौरान नालों में कूड़ा-कचरा जमा होने से होने वाली समस्या को गंभीर बताते हुए विशेष निगरानी टीम गठित करने के निर्देश भी दिए। यह टीम बारिश के समय लगातार निगरानी करेगी और जहां भी नाले चोक होंगे, वहां तुरंत उन्हें खुलवाने की कार्रवाई करेगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी (यूयूएसडीए) द्वारा 362 करोड़ रुपये की लागत से शहर में पहले से ही ड्रेनेज सुधार कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों के तहत प्रमुख नालों का चौड़ीकरण, सफाई और आउटफॉल निर्माण शामिल है। अधिकारियों के अनुसार रकसिया नाले का आउटफॉल कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि अन्य कार्य तेजी से प्रगति पर हैं।
नई प्रस्तावित 430 करोड़ की योजना के तहत शहर को 7 जोनों में विभाजित कर वैज्ञानिक तरीके से जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग आउटफॉल निर्धारित किए गए हैं, जिनमें रकसिया नाला, पनियाली नाला, भाखड़ा, आवला चौकी, हाथीखाल क्षेत्र और गौला नदी शामिल हैं।
बैठक में सिंचाई विभाग और यूयूएसडीए के अधिकारियों ने परियोजना के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। आयुक्त ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और परियोजना को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। इस योजना के लागू होने के बाद हल्द्वानी के हजारों लोगों को हर साल होने वाली जलभराव की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही शहर की आधारभूत संरचना भी और अधिक सुदृढ़ होगी।


