उत्तराखंड सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों और एकल अभिभावकों के लिए बाल्य देखभाल अवकाश (सीसीएल) के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। शासन द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार अब एक बार में न्यूनतम पांच दिन से कम तथा अधिकतम 120 दिन से अधिक का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
सरकार ने अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया में भी बदलाव करते हुए यह अधिकार नियुक्ति प्राधिकारी के स्थान पर सक्षम प्राधिकारी को सौंप दिया है। अब वही अधिकारी सीसीएल स्वीकृत कर सकेंगे, जो उपार्जित अवकाश को मंजूरी देने के लिए अधिकृत हैं।
शासन का मानना है कि इस बदलाव से अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और तेज होगी। पूर्व में यह अधिकार नियुक्ति प्राधिकारी के पास था, जिसे अब संशोधित कर दिया गया है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार की महिला कर्मचारियों तथा एकल अभिभावकों (महिला एवं पुरुष दोनों) को पूरे सेवाकाल में अधिकतम दो वर्ष का बाल्य देखभाल अवकाश प्रदान किया जाता है। यह अवकाश निर्धारित शर्तों के अधीन ही मान्य होगा।
इसके अलावा शासनादेश (1 जून 2003) के अनुसार बाल्य देखभाल अवकाश को उपार्जित अवकाश की तरह ही माना जाएगा। इस अवधि में आने वाले सभी सार्वजनिक अवकाश भी सीसीएल में शामिल रहेंगे और अलग से अतिरिक्त अवकाश का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार के इस निर्णय को प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और व्यावहारिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


