जहाँ एक ओर देशभर में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं इसी अभियान ने मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में 22 साल पहले बिछड़े एक परिवार को फिर से मिला दिया।
मंदसौर जिले में एक बुज़ुर्ग मां को अपने उस बेटे से मिलने का अवसर मिला, जो करीब 22 साल पहले घर छोड़कर लापता हो गया था। इस भावुक मिलन की जानकारी जिले की कलेक्टर अदिति गर्ग ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की। उन्होंने बताया कि यह पुनर्मिलन चुनाव आयोग के SIR अभियान और पुलिस की सक्रिय भूमिका के कारण संभव हो सका।
कलेक्टर अदिति गर्ग के अनुसार, निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है। इसी प्रक्रिया के दौरान 22 साल पहले लापता हुए विनोद गायरी (पिता—बालूराम गायरी), निवासी ढाकरिया मोहल्ला, खिलचीपुरा, मंदसौर का अपने परिवार से संपर्क स्थापित हो सका। विनोद ने प्रेम विवाह के विरोध के चलते वर्ष 2003 में घर छोड़ दिया था।
दरअसल, वर्तमान में राजस्थान के नागौर जिले में रह रहे विनोद ने SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में अपना नाम सत्यापित कराने का प्रयास किया। इसके लिए उसे अपने माता-पिता के मतदाता पहचान पत्र (EPIC) नंबर की आवश्यकता पड़ी। इसी सिलसिले में उसने अपने गांव की ग्राम पंचायत से संपर्क किया। यह सूचना किसी माध्यम से उसकी मां तक पहुंच गई।
इसके बाद बुज़ुर्ग महिला मंदसौर के नई आबादी थाना पहुँची और पुलिस को पूरे मामले की जानकारी देते हुए अपने लापता बेटे से मिलवाने की गुहार लगाई। महिला के आवेदन को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी ने सब-इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह राठौर के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया।
पुलिस टीम ने ग्राम पंचायत और तहसील निर्वाचन कार्यालय से आवश्यक जानकारी जुटाई और विनोद के वर्तमान पते का पता लगाया। जांच में सामने आया कि विनोद नागौर, राजस्थान में रह रहा है और वहीं मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया में जुटा हुआ था।
इसके बाद पुलिस टीम नागौर पहुँची और विनोद, उसकी पत्नी तथा उनके दो बच्चों से मुलाकात की। पुलिस ने विनोद को समझाया और परिवार सहित मंदसौर लौटने के लिए राज़ी किया। परिणामस्वरूप, 22 साल बाद एक मां अपने बेटे, बहू और पोते-पोतियों से मिल सकी।
पुलिस के अनुसार, विनोद ने मंदसौर की ही धनगर समुदाय की युवती पुष्पा से प्रेम विवाह किया था। परिवार के विरोध के बाद वह घर छोड़कर राजस्थान चला गया, जहाँ वह एक निजी स्कूल में चपरासी के रूप में कार्यरत रहा। अब 45 वर्षीय विनोद दो बच्चों का पिता है—21 वर्षीय बेटा, जिसकी शादी हो चुकी है, और 16 वर्षीय बेटी।
कलेक्टर अदिति गर्ग ने बताया कि SIR अभियान और नई आबादी थाना पुलिस के अथक प्रयासों के चलते एक ऐसा परिवार, जो दो दशकों से अधिक समय से बिछड़ा हुआ था, आखिरकार फिर से एक हो सका।


