देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। इसका सबसे अधिक असर उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों पर देखने को मिल रहा है, जहां भीषण गर्मी और उमस का दौर जारी है। मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, उत्तराखंड में मानसून के आगमन में देरी हो सकती है और इसके जून के अंतिम सप्ताह तक राज्य में पहुंचने की संभावना है।
पहले अनुमान लगाया गया था कि मानसून 22 से 25 जून के बीच उत्तराखंड में प्रवेश करेगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसकी रफ्तार धीमी हो गई है। देहरादून स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र के निदेशक सीएस तोमर ने बताया कि वर्तमान मौसमीय स्थितियों के आधार पर मानसून के जून के आखिर तक राज्य में पहुंचने की उम्मीद है।
मानसून की धीमी प्रगति का असर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों पर पड़ सकता है। बारिश में देरी के कारण इन क्षेत्रों में गर्मी और उमस लंबे समय तक बनी रहने की आशंका है। साथ ही कृषि कार्य, जल उपलब्धता और खरीफ फसलों की बुवाई भी प्रभावित हो सकती है।
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक शुरुआत केरल में इसके आगमन से मानी जाती है। इस वर्ष मानसून केरल में सामान्य तिथि से तीन दिन की देरी से 1 जून को पहुंचा था। मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल प्रायद्वीपीय और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों से गुजर रही है तथा आने वाले दिनों में इसके तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ की ओर आगे बढ़ने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञ मानसून की सुस्त प्रगति के पीछे ‘अल नीनो’ प्रभाव को प्रमुख कारण मान रहे हैं। अल नीनो एक वैश्विक मौसमीय घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर भारतीय मानसून पर पड़ता है और कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा की स्थिति बन सकती है।
इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) समेत कई एजेंसियों ने इस वर्ष दक्षिण एशिया में सामान्य से अधिक गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क मानसून की आशंका जताई है।
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तराखंड में हरिद्वार और उधम सिंह नगर को छोड़कर अधिकांश जिलों में 25 जून तक हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है।


