उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्रों में हो रहे अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर मामला गर्मा गया है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में देहरादून की तलहटी (फुटहिल) क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
नैनीताल में हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण, जैव विविधता बोर्ड समेत अन्य संबंधित पक्षों को तीन हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
यह जनहित याचिका देहरादून निवासी रेनू पॉल द्वारा दायर की गई थी। याचिका में कहा गया है कि देहरादून जिले के ऐसे फुटहिल क्षेत्र, जहां ढलान 30 डिग्री तक है और जो भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं, वहां बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। जबकि ये इलाके पर्यावरणीय रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं और यहां निर्माण से भविष्य में गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं।
गौरतलब है कि पहले भी हाईकोर्ट ने इन क्षेत्रों में निर्माण कार्य पर रोक लगाने और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे, लेकिन लंबे समय तक इस मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। अब याचिकाकर्ता द्वारा दोबारा शपथ पत्र दाखिल करने के बाद कोर्ट ने इस पर सख्ती दिखाई है।
हाईकोर्ट ने साफ किया है कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा और सभी पक्ष तय समय में जवाब प्रस्तुत करें। अब इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी।
उल्लेखनीय है कि देहरादून में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण जंगल और कृषि भूमि की जगह कंक्रीट के ढांचे खड़े हो रहे हैं, जिस पर हाईकोर्ट पहले भी चिंता जता चुका है।


