उत्तराखंड में आयोजित जिला योजना समिति की बैठक में उस समय तीखा विवाद खड़ा हो गया, जब कांग्रेस और बसपा विधायकों ने अपने प्रस्ताव एजेंडे में शामिल न किए जाने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। बैठक की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज कर रहे थे।
हरिद्वार जिले की बैठक शुरू होने से पहले ही सभी छह विपक्षी विधायक अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध जताने लगे। कुछ ही देर में उन्होंने एजेंडे की फाइल फेंक दी और बैठक का बहिष्कार करते हुए बाहर निकल गए। बहिष्कार करने वालों में बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद और कांग्रेस के पांच विधायक शामिल थे।
बैठक से बाहर निकलने के बाद कांग्रेस विधायक रवि बहादुर, अनुपमा रावत, फुरकान अहमद, ममता राकेश, वीरेंद्र जाति और बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद ने बैठक स्थल के बाहर धरना दिया और जोरदार नारेबाजी की। विधायकों का आरोप था कि उनके क्षेत्रों से जुड़े विकास प्रस्तावों को नजरअंदाज किया गया, जबकि ठेकेदारों और अधिकारियों के प्रस्तावों को प्राथमिकता दी गई।
कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने कहा कि उनके क्षेत्र के 84 गांवों से जुड़े बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के मुद्दों को एजेंडे में शामिल नहीं किया गया, जिससे बैठक का कोई औचित्य नहीं रह जाता। वहीं ममता राकेश ने भी आरोप लगाया कि विपक्षी विधायकों के प्रस्ताव जानबूझकर शामिल नहीं किए गए।
बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद ने प्रशासन पर ठेकेदारों के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों के सुझावों को महत्व नहीं दिया जाएगा, तो बैठक में उनकी भागीदारी का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
वहीं प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बैठक में सभी विभागों और क्षेत्रों से जुड़े प्रस्ताव शामिल किए गए थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल विरोध करना था और बार-बार अनुरोध के बावजूद विधायक बैठक में शामिल होने को तैयार नहीं हुए।


