उत्तराखंड में जेल सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला कारागार अल्मोड़ा में नियमित तलाशी के दौरान एक कैदी की बैरक की टॉयलेट सीट के भीतर से प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार 2 फरवरी को हरिद्वार जिले के गंगनहर क्षेत्र की नई बस्ती निवासी सिद्धदोष कैदी प्रवीण वाल्मीकि पुत्र मोहन लाल उर्फ मदन लाल की बैरक की तलाशी ली गई। तलाशी के समय बंदी हरिद्वार न्यायालय में पेशी पर गया हुआ था। जेल कर्मियों को बैरक की टॉयलेट सीट के भीतर संदिग्ध सामग्री छिपे होने की जानकारी मिली।
सूचना पर जेल अधीक्षक जयंत पांगती मौके पर पहुंचे और टॉयलेट सीट को तुड़वाकर गहन तलाशी के निर्देश दिए। तलाशी के दौरान सीट के अंदर से एक स्मार्ट वॉच, चार्जर, एक सफेद और एक काले रंग की डाटा केबल तथा स्मार्ट वॉच चार्जिंग केबल बरामद की गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बरामद स्मार्ट वॉच की कॉन्टैक्ट लिस्ट में अलग-अलग नामों से 12 मोबाइल नंबर सेव थे, जिससे संदेह और गहरा गया है। सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सीलबंद कर साक्ष्य के रूप में अल्मोड़ा कोतवाली भेज दिया गया है।
जेल अधीक्षक जयंत पांगती ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अल्मोड़ा कोतवाली में तहरीर दी है और उत्तराखंड कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं अधिनियम 2024 की धारा 39 के तहत कार्रवाई की मांग की है। वहीं, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सतीश चंद्र कापड़ी ने बताया कि जेल अधीक्षक की तहरीर के आधार पर कारागार अधिनियम 1894 की धारा 42 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जेल के भीतर बैरक तक कैसे पहुंचे। पुलिस अब इस मामले में अंदरूनी मिलीभगत और बाहरी साजिश समेत सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।


