उत्तराखंड स्थित पथरेश्वर महादेव मंदिर में दो साधुओं की हत्या के चर्चित मामले का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में आशु, अखिल गिरी उर्फ अंकुर और राममिलन को गिरफ्तार किया है, जबकि वारदात का चौथा आरोपी उत्तम गिरी अभी फरार है। उसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बुधवार को प्रेसवार्ता में बताया कि पथरी थाना क्षेत्र में हुई वारदात में प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हत्या के पीछे मंदिर की गद्दी को लेकर विवाद और कथित ब्लैकमेलिंग मुख्य कारण रहे। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच के दौरान आरोपियों से पूछताछ में कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
उन्होंने बताया कि 21 जुलाई को मंदिर के सेवादार उत्तम झा ने साधु पारस गिरी और सेवा गिरी के लापता होने की सूचना दी थी। साथ ही उसने बताया कि उसने रात के समय मंदिर के पास जंगल में उत्तम गिरी और आशु को गड्ढा खोदते हुए देखा था। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर खुदाई कराई, जहां दोनों साधुओं के शव बरामद हुए।
पुलिस जांच में पता चला कि 18 जुलाई की रात मंदिर परिसर में पारस गिरी, सेवा गिरी, अखिल गिरी, उत्तम गिरी, आशु और राममिलन मौजूद थे और सभी ने साथ बैठकर शराब पी थी। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पारस गिरी को मुख्य पुजारी अखिल गिरी के निजी संबंधों की जानकारी हो गई थी, जिसके बाद कथित रूप से उसे लेकर विवाद और ब्लैकमेलिंग शुरू हो गई। इसी के साथ मंदिर की गद्दी को लेकर भी तनाव बढ़ता गया।
पुलिस के अनुसार, वारदात वाली रात आरोपियों ने पहले मंदिर के सीसीटीवी कैमरे बंद किए और फिर गन्ना काटने में इस्तेमाल होने वाली पाठल से दोनों साधुओं की हत्या कर दी। इसके बाद शवों को मंदिर के पास जंगल में गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। आरोपियों ने हत्या के सबूत मिटाने के लिए खून के निशान साफ किए और खून से सने गद्दे को जला दिया।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पाठल और शवों को दफनाने में इस्तेमाल फावड़ा भी बरामद कर लिया है। फरार आरोपी उत्तम गिरी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पूरी की जाएगी।


