उत्तराखंड हाईकोर्ट में गिरफ्तार आरोपियों की सार्वजनिक पिटाई, परेड कराने और उनकी पहचान उजागर करने जैसी पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की ओर से दाखिल इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, प्रमुख सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह बाद की तारीख तय की है।
जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाल के समय में पुलिस द्वारा गिरफ्तार या आरोपित व्यक्तियों को सार्वजनिक रूप से पीटना, उनकी परेड कराना, मीडिया के सामने पेश करना और उनकी फोटो-वीडियो पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई संविधान में मिले मौलिक अधिकारों और निर्दोष माने जाने के सिद्धांत का उल्लंघन है।
याचिका में उधम सिंह नगर के रुद्रपुर में रेप केस के आरोपियों को पुलिस निगरानी में जनता द्वारा पीटे जाने, उनकी सार्वजनिक परेड कराए जाने और बिना मास्क के उनकी फोटो-वीडियो साझा किए जाने के मामले का भी उल्लेख किया गया है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रभा नैथानी ने बताया कि याचिका में 28 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो का हवाला दिया गया है। इन वीडियो में कथित रूप से पुलिसकर्मियों द्वारा सड़क पर लोगों को लाठी-डंडों से पीटते हुए दिखाए जाने का दावा किया गया है। याचिका में कहा गया है कि ऐसी घटनाएं न्यायिक प्रक्रिया के बजाय सार्वजनिक प्रतिशोध की भावना को बढ़ावा दे सकती हैं।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारी, हिरासत, बल प्रयोग, मीडिया से बातचीत और आरोपियों की पहचान सार्वजनिक करने को लेकर पूरे राज्य में एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने के निर्देश दिए जाएं।
याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट के इस्लाम खान बनाम राज्य राजस्थान मामले का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि राजस्थान में गिरफ्तार व्यक्तियों के साथ व्यवहार को लेकर एसओपी बनाई गई थी और उत्तराखंड में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की जरूरत है। अब इस मामले में राज्य सरकार और पुलिस विभाग के जवाब के बाद हाईकोर्ट आगे की सुनवाई करेगा।


