उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चमोली के गोविंदघाट स्थित हेलीपैड के अस्थाई अधिग्रहण को गैरकानूनी करार देते हुए जिला प्रशासन की ओर से जारी अधिग्रहण आदेशों को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने चमोली प्रशासन के 23 मई 2024 और 27 जून 2025 के आदेश निरस्त करते हुए हेलीपैड का कब्जा संबंधित कंपनी को वापस सौंपने के निर्देश दिए हैं।
मामला मेसर्स डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका से जुड़ा है। कंपनी वर्ष 2011 से गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए हेलीकॉप्टर सेवा संचालित कर रही है। कंपनी ने निजी भूमि लीज पर लेकर वहां हेलीपैड और यात्री लाउंज विकसित किया था। मई 2024 में चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान जिला प्रशासन और नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण ने आपात स्थिति का हवाला देते हुए हेलीपैड का कब्जा लेकर इसका संचालन पवन हंस लिमिटेड को सौंप दिया था।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जनहित और यात्रा सीजन के कारण तत्काल कार्रवाई को जरूरी बताया। साथ ही कंपनी की लीज का पंजीकरण समाप्त होने की दलील दी गई। हाईकोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013 की धारा 81(2) के तहत किसी संपत्ति के अस्थाई अधिग्रहण से पहले प्रभावित पक्ष को लिखित नोटिस देना और पर्याप्त समय देना जरूरी है। बिना पूर्व सूचना या महज 24 घंटे का समय देकर संपत्ति पर कब्जा लेना कानून के अनुरूप नहीं है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लीज के पंजीकरण की स्थिति के बावजूद कंपनी वास्तविक कब्जे में थी और कानून के तहत ‘हितबद्ध व्यक्ति’ थी। इसलिए उसे नोटिस देने और अपना पक्ष रखने का अधिकार था।
हाईकोर्ट ने चमोली के जिलाधिकारी को 15 दिनों के भीतर गोविंदघाट हेलीपैड का पूरा नियंत्रण और कब्जा डेक्कन चार्टर्स को वापस सौंपने तथा अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अवैध अधिग्रहण की पूरी अवधि के लिए कंपनी को यूकाडा की हेलीपैड नीति 2023-24 और लैंडिंग दर सूची 2018 के अनुसार उचित मुआवजा एवं लैंडिंग शुल्क का भुगतान करने का आदेश दिया है।


