उत्तराखंड की धरती एक बार फिर भूकंपीय झटकों से डोल उठी। मंगलवार को फिर भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया। हालांकि तीव्रता कम होने के कारण अधिकांश क्षेत्रों में लोगों को झटकों का अहसास तक नहीं हुआ।
भूकंप का केंद्र एक बार फिर बागेश्वर जिला रहा। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.6 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र बागेश्वर जिला बताया गया है।
गौरतलब है कि पिछले तीन दिनों में उत्तराखंड में लगातार भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। 21 अप्रैल को बागेश्वर में भूकंप आया, जबकि 20 अप्रैल को बागेश्वर के साथ-साथ पौड़ी गढ़वाल में भी झटके महसूस किए गए थे। इससे पहले 19 अप्रैल को बागेश्वर में तीन बार भूकंप दर्ज किया गया था। हालांकि सभी झटके हल्के थे और किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है।
उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। पहले राज्य को जोन-4 और जोन-5 में रखा गया था, लेकिन वर्ष 2025 में भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा जारी नए सिस्मिक जोन मैप में पूरे उत्तराखंड को जोन-6 में शामिल कर दिया गया है, जिसे सबसे अधिक संवेदनशील श्रेणी माना जाता है। इसके बाद राज्य सरकार ने भवन निर्माण मानकों में संशोधन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सीबीआरआई निदेशक के नेतृत्व में एक समिति गठित की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार पूरी हिमालयी बेल्ट, जो अरुणाचल प्रदेश से लेकर जम्मू-कश्मीर तक फैली है, अब जोन-6 में शामिल है। इसका अर्थ है कि इस पूरे क्षेत्र में बड़े या विनाशकारी भूकंप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लगातार आ रही इन हल्की भूकंपीय गतिविधियों को वैज्ञानिक चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है, जो क्षेत्र में सक्रिय टेक्टोनिक हलचलों की ओर संकेत करती हैं।


