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ड्रोन से निगरानी, अर्ली वार्निंग से सुरक्षा…शीतलहर पर सीएम धामी का बड़ा प्लान

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उत्तराखंड में शुक्रवार को शीतलहर से पहले की तैयारियों को लेकर एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने शीतलहर, बाढ़, मॉक अभ्यास, हवाई यातायात सहायता की एसओपी, आपदा प्रबंधन विभाग के नववर्ष कैलेंडर 2026 और आपदा प्रबंधन हस्त पुस्तिका का विमोचन किया।

कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025 के दौरान आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में बेहतर योगदान देने वाले लोगों और युवा आपदा मित्रों को सम्मानित किया। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से उपलब्ध कराए गए चार वाहनों को मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा प्रबंधन किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासन, स्थानीय निकाय, स्वयंसेवी संगठन और आम जनता की सहभागिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण देश की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है और उत्तराखंड सरकार भी इसी दिशा में आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए काम कर रही है।

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सीएम धामी ने बताया कि राज्य में ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार बेहतर किया जा रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेंसर लगाने, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने और रैपिड रिस्पॉन्स टीमों के गठन जैसे कदमों से आपदा जोखिम को कम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में हिमस्खलन एक गंभीर खतरा है। कई क्षेत्र हिमस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील हैं, ऐसे में पर्यटन, तीर्थाटन और पर्वतारोहण गतिविधियों को सुरक्षित बनाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है और प्रशिक्षित रेस्क्यू बलों की तैनाती की जा रही है।

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मुख्यमंत्री ने बताया कि शीतलहर और अत्यधिक हिमपात से निपटने के लिए राज्य में कई ठोस कदम उठाए गए हैं। सभी जिलों को अर्ली वार्निंग सिस्टम से जोड़ा गया है और जिलाधिकारियों को अलाव, रैन बसेरों और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि मौसम विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है, ताकि शीतलहर और हिमपात प्रभावित क्षेत्रों में समय पर चेतावनी और आवश्यक तैयारियां की जा सकें।

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सीएम धामी ने यह भी कहा कि शीतलहर के दौरान हाइपोथर्मिया, जुकाम, फ्लू और निमोनिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए सभी जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल टीमों को सक्रिय रखा जाएगा। सीमांत और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आवश्यक दवाइयों, हीटिंग उपकरणों और प्राथमिक उपचार सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए युवा आपदा मित्र और आपदा सखी जैसी पहलों को और मजबूत कर रही है। इस कार्यशाला के माध्यम से शीत ऋतु में आने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा और विभागों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाएगा।

 

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हिल दर्पण डेस्क

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