ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले 17वें दिन भी जारी हैं और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को लेकर स्थिति और गंभीर हो गई है। ईरान पर आरोप है कि वह इस अहम समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही में बाधा डाल रहा है।
इस मुद्दे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर नाटो (NATO) होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने में अमेरिका की मदद नहीं करता है, तो इसका भविष्य अच्छा नहीं होगा।
इजराइली वायु सेना (IAF) के अनुसार, उसने पिछले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी और मध्य ईरान में 200 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में मिसाइल सिस्टम, रक्षा प्रतिष्ठान और ऑपरेशनल हेडक्वार्टर जैसे सैन्य ढांचों को निशाना बनाया गया।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया कि अमेरिका ने संयुक्त अरब अमीरात के रास अल-खैमाह और दुबई के पास स्थित एक स्थान से खार्ग द्वीप और अबू मूसा द्वीप पर हमले किए हैं। उन्होंने इसे बेहद खतरनाक कदम बताते हुए कहा कि ईरान स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहा है ताकि किसी भी आबादी वाले इलाके को नुकसान न पहुंचे।
हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के इन दावों पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी हमलों में खार्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है।
ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को रोकता रहा, तो तेल से जुड़े अहम बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है।
इस बीच वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ट्रंप ने शनिवार को उम्मीद जताई कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और खुला रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे।
वहीं ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया पर पड़ोसी देशों से अपील की कि वे विदेशी सैन्य ताकतों को अपने क्षेत्र से बाहर निकालें। उन्होंने ट्रंप की इस अपील को “भीख मांगने जैसा” करार दिया।


