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सूटकेस में छुपा शव और लव ट्रायंगल…अदालत ने सुनाया सख्त फैसला

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उत्तराखंड में चर्चित लिव-इन पार्टनर हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरिद्वार राकेश कुमार सिंह की अदालत ने मुख्य अभियुक्त रोहित को आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं सह-अभियुक्ता मंजू कुमारी को साक्ष्य छिपाने के अपराध में पांच वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है।

यह मामला वर्ष 2020 का है। मृतका के परिजनों की ओर से मकान मालिक ने मुकदमा दर्ज कराया था। छह वर्षों तक चले मुकदमे में मजबूत पैरवी के बाद अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई, जिससे परिजनों को न्याय मिला।

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शासकीय अधिवक्ता कुशल पाल सिंह चौहान के अनुसार, ग्राम रावली महदूद निवासी सुखबीर सिंह चौहान ने 25 मई 2020 को थाना सिडकुल में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि रोहित (निवासी नवादा, बिहार) और सोनम उर्फ वर्षा (निवासी ग्वालियर, मध्य प्रदेश) सिडकुल स्थित एक फैक्ट्री में कार्यरत थे और मार्च 2020 में शिवनगर कॉलोनी, डेंसो चौक के पास उनके मकान में किराए पर रहने लगे थे। दोनों लिव-इन संबंध में रह रहे थे।

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कोरोना लॉकडाउन के दौरान 24 मई 2020 की रात मकान के एक कमरे से दुर्गंध आने की सूचना मिली। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बाथरूम में रखे एक सूटकेस को खोला, जिसमें प्लास्टिक के कट्टे में पैक सोनम का शव बरामद हुआ।

जांच में सामने आया कि रोहित का संबंध सोनम और मंजू कुमारी (निवासी फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश) दोनों से था। प्रेम संबंधों को लेकर तीनों के बीच विवाद होता रहता था। इसी रंजिश में रोहित और मंजू ने मिलकर सोनम की हत्या कर दी और शव को सूटकेस में छिपा दिया।

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पुलिस ने 29 मई 2020 को मंजू को सिडकुल क्षेत्र से गिरफ्तार किया, जबकि रोहित को बाद में गाजियाबाद क्षेत्र से पकड़ा गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाह पेश किए गए।

सुनवाई के बाद न्यायालय ने रोहित को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्य छिपाना) का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं मंजू को साक्ष्य छिपाने का दोषी पाते हुए पांच वर्ष के कारावास की सजा दी गई।

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हिल दर्पण डेस्क

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