अक्सर तलाक को समाज में असफलता के रूप में देखा जाता रहा है। इसे लेकर लोगों के बीच तरह-तरह के सवाल उठते हैं और महिलाओं को कई सामाजिक दबावों का सामना करना पड़ता है। लेकिन मेरठ में सामने आई एक घटना ने इस सोच को बदलने का काम किया है।
यहां रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता शर्मा के तलाक को एक नई शुरुआत के रूप में स्वीकार करते हुए उसे सम्मान के साथ घर वापस लाया। प्रणिता की शादी 14 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर निवासी मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी, लेकिन शादी के बाद उन्हें लंबे समय तक मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
आखिरकार, उन्होंने मेरठ फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी, जिसे मंजूरी मिल गई। इसके बाद परिवार ने इस फैसले को दुख नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की जीत मानते हुए जश्न के रूप में मनाया। कोर्ट से घर तक ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया गया और मोहल्ले में मिठाइयां बांटी गईं।
प्रणिता के पिता ने साफ कहा कि उनकी बेटी कोई वस्तु नहीं, बल्कि उनका गर्व है। उन्होंने ससुराल पक्ष से किसी भी तरह का भत्ता या सामान लेने से इनकार कर दिया और बेटी की वापसी को उसी सम्मान के साथ मनाया, जैसे उसकी विदाई हुई थी।
प्रणिता शर्मा, जो मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट हैं और फाइनेंस डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं, ने महिलाओं को संदेश दिया कि वे शिक्षित और आत्मनिर्भर बनें और किसी भी प्रकार की प्रताड़ना के खिलाफ चुप न रहें।


