उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान लंबे समय से निलंबित चल रहे एक पुलिसकर्मी को बड़ी राहत प्रदान की है। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने 17 जुलाई 2021 से निलंबित पुलिसकर्मी नरेंद्र के खिलाफ जारी निलंबन आदेश को रद्द कर दिया।
यह मामला उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें उधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी निलंबन आदेश को चुनौती दी गई थी। जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता 13 जून 2021 के बाद से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित था। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि निलंबन आदेश जल्दबाजी में और बिना उचित जांच के जारी किया गया था।
सुनवाई के दौरान उप महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उधम सिंह नगर के एसएसपी ने 27 अप्रैल 2026 को गोरखपुर के जिला मजिस्ट्रेट को पत्र भेजकर याचिकाकर्ता के अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र की जांच रिपोर्ट मांगी थी।
अदालत ने माना कि किसी कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक निलंबित नहीं रखा जा सकता। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने अपने आदेश में कहा कि पुलिसकर्मी लगभग पांच वर्षों से निलंबित है और जाति प्रमाणपत्र की जांच अभी भी लंबित है, जिससे अनुशासनात्मक जांच जल्द पूरी होने की संभावना नहीं दिखती। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया।


