उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव जल्द कराए जाने की संभावना है। राज्य में लंबे समय से 3800 से अधिक पंचायत पद खाली पड़े हैं, जिसके चलते ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
पंचायत निदेशालय की ओर से इन रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। पिछले वर्ष हरिद्वार जिले को छोड़कर 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुए थे, जबकि नवंबर 2025 में उपचुनाव भी कराए गए थे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पद खाली रह गए।
आंकड़ों के अनुसार, ग्राम पंचायत सदस्यों के कुल 55,587 पदों में से 3,843 पदों पर नामांकन ही नहीं हो सका। इसके अलावा देहरादून और उत्तरकाशी में क्षेत्र पंचायत सदस्य के एक-एक पद रिक्त हैं, जबकि अल्मोड़ा के भिकियासैंण में क्षेत्र प्रमुख और ऊधमसिंह नगर के सितारगंज में कनिष्ठ उप प्रमुख का पद भी खाली है।
प्रदेश में 33 ग्राम पंचायतें असंगठित (अनऑर्गनाइज्ड) स्थिति में हैं, जिससे न तो इन पंचायतों की नियमित बैठकें हो पा रही हैं और न ही केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता मिल रही है। इनमें पौड़ी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और ऊधमसिंह नगर जिलों की कई ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, जब तक ये पंचायतें असंगठित रहेंगी, तब तक उन्हें 15वें वित्त आयोग की धनराशि भी नहीं मिल पाएगी, जिससे विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा। पंचायत निदेशालय का कहना है कि खाली पदों को भरने के लिए उपचुनाव आवश्यक हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों को गति मिल सके।


