उत्तराखंड उच्च न्यायालय में काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में नामजद लोगों की गिरफ्तारी और दर्ज मुकदमे को लेकर एक अहम सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद राज्य सरकार को केस की जांच की प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए शपथ पत्र पर अपना जवाब प्रस्तुत करें।
इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। 9 अप्रैल को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने बताया कि मामले में चार्जशीट तैयार हो चुकी है और कुल 12 लोग नामजद हैं। कोर्ट ने इस संबंध में एक अतिरिक्त शपथ पत्र पेश करने के लिए सरकार को निर्देश दिया।
कोर्ट ने पहले ही याचिकाकर्ताओं से कहा था कि वे जांच में सहयोग करें और उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) स्वयं इस केस की निगरानी कर रहे हैं। जांच एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) को सौंप दी गई है।
मामला 10-11 जनवरी की रात हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र के एक होटल में काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या से जुड़ा है। आत्महत्या से पहले सुखवंत ने फेसबुक लाइव के माध्यम से कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके साथ जमीन के मामले में धोखाधड़ी हुई और लगभग चार करोड़ रुपये उनसे ठग लिए गए।
किसान ने आरोप लगाया कि उन्होंने बार-बार पुलिस में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की और उल्टा उन्हें डराया धमकाया। आत्महत्या के बाद पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 26 लोगों के खिलाफ आईटीआई थाना में मुकदमा दर्ज किया।
मुकदमे में अमरजीत सिंह, दिव्या, रविंद्र कौर, लवप्रीत कौर, कुलविंदर सिंह उर्फ जस्सी, हरदीप कौर, आशीष चौहान, गिरवर सिंह, महीपाल सिंह, शिवेंद्र सिंह, विमल, विमल की पत्नी, देवेंद्र, राजेंद्र, गुरप्रेम सिंह, जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, अमित, मोहित, सुखवंत सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवंत सिंह बक्सौरा, बिजेंद्र, पूजा और जहीर शामिल हैं।
आज की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनका इस केस से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। उनका कहना था कि मामला दो पक्षों के बीच आपसी जमीन विवाद से जुड़ा है और किसान ने आत्महत्या की। इसलिए उन्होंने कोर्ट से उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने और दर्ज मुकदमा निरस्त करने की मांग की। नैनीताल हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अगली सुनवाई की तारीख 20 अप्रैल तय की।


