उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और समान वेतनमान से जुड़े मामले में राज्य सरकार पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के पूर्व आदेशों का पालन नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने संबंधित सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार, 9 जुलाई को न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नियमावली में संशोधन आवश्यक है, इसलिए सरकार को कुछ और समय दिया जाए। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पूर्व में दिए गए आदेशों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जो प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला बनता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार हर सुनवाई में केवल समय मांगती रही है।
सुनवाई के दौरान उपनल कर्मचारी संघ की ओर से अदालत को बताया गया कि कर्मचारियों पर ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ का लाभ देने के नाम पर बॉन्ड भरने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसे संघ ने अनुचित और नियमों के विरुद्ध बताया।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तारीख तय करते हुए संबंधित सचिव को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
दरअसल, उपनल कर्मचारी संघ ने करीब एक वर्ष पहले हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। संघ का आरोप है कि सरकार लगातार अतिरिक्त समय मांगकर मामले को टालती रही है, जबकि कोर्ट के आदेशों का अब तक पालन नहीं किया गया। इससे प्रदेशभर के हजारों उपनल कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
याचिका के अनुसार वर्ष 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के संबंध में आदेश दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, लेकिन वर्ष 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने भी कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बावजूद सरकार ने नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई और न ही अदालत के आदेशों का पूरी तरह पालन किया। उपनल कर्मचारी संघ का कहना है कि सरकार की ओर से लगातार हो रही देरी के कारण प्रदेश के करीब 22 हजार उपनल संविदा कर्मचारी अब भी अपने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।


