उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में वीआईपी मेहमानों के आवास और भोजन पर मंदिर समिति के बजट से खर्च किए जाने के मामले में जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड शासन ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
मामला श्री बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के बजट से बिना सक्षम अनुमोदन के करीब छह लाख रुपये खर्च किए जाने से जुड़ा है। शासन ने बीकेटीसी की जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विजय थपलियाल समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मंदिर समिति को पत्र भेजा है। अब आगे की कार्रवाई समिति स्तर पर की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। यात्रा सीजन के दौरान 30 अप्रैल से 15 मई के बीच आने वाले वीआईपी और अन्य अतिथियों के ठहरने के लिए होटल, लॉज और जीएमवीएन के विश्राम गृहों में व्यवस्था की गई। आरोप है कि इन व्यवस्थाओं के भुगतान से पहले वित्त अधिकारी और समिति अध्यक्ष से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। इसके बजाय संबंधित अधिकारियों ने अपने स्तर पर मंजूरी देते हुए करीब छह लाख रुपये की अग्रिम राशि जारी कर दी।
यह मामला आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद चर्चा में आया। इसके बाद बीकेटीसी ने पूरे प्रकरण की जांच कराई। जांच में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने पर रिपोर्ट उत्तराखंड शासन को भेजी गई।
जांच रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद शासन ने तत्कालीन सीईओ विजय थपलियाल, मुख्य प्रभारी अधिकारी अनिल ध्यानी और केदारनाथ मंदिर के व्यवस्थापक अरविंद शुक्ला की भूमिका को प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना है। शासन ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 तथा उससे संबंधित नियमावलियों के तहत तीनों के खिलाफ तत्काल नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिर समिति वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी दोषी को बख्शेगी नहीं। उन्होंने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


