इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 27 वर्षों बाद रक्षाबंधन पर ऐसा विशेष संयोग बन रहा है, जब भद्रा का साया नहीं रहेगा और एक साथ पांच शुभ योगों का निर्माण होगा। इस कारण धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार का रक्षाबंधन बेहद खास माना जा रहा है।
ज्योतिषविदों के मुताबिक रक्षाबंधन के दिन सुकर्मा योग, बुधादित्य योग, उभयचरी योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और त्रिपुष्कर योग का संयोग बन रहा है। खास बात यह है कि इस बार भद्रा काल नहीं रहेगा, ऐसे में पूरे दिन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जा सकेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में रक्षाबंधन का पर्व मनाना शुभ नहीं माना जाता है।
श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। इस पर्व का संबंध केवल भाई-बहन के रिश्ते से ही नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा से भी माना जाता है।
रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं, गुरु अपने शिष्यों और पुरोहित अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधकर उनके मंगल और कल्याण का आशीर्वाद देते हैं। पांच शुभ योगों और भद्रा के अभाव के कारण इस बार रक्षाबंधन को विशेष धार्मिक महत्व वाला पर्व माना जा रहा है।


