उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में प्रदेशभर से चयनित 140 छात्र-छात्राओं से संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के विचार, सुझाव और भविष्य के उत्तराखंड को लेकर उनके विजन को जाना। उन्होंने कहा कि युवाओं से प्राप्त उपयोगी और व्यावहारिक सुझावों को राज्य सरकार की योजनाओं और नीति-निर्धारण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैब उपलब्ध कराने के लिए उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के साथ विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
कार्यक्रम में विभिन्न उप-विषयों पर उत्कृष्ट विचार प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। ‘शिक्षा एवं युवा अवसर’ में मयूह भंडारी और रवीना, ‘पर्यावरण, वन एवं आपदा प्रतिरोधक क्षमता’ में शेरोन कपूर, ‘स्वास्थ्य एवं जन सेवाएं’ में सतीश कुमार, ‘पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन एवं रोजगार’ में माही बलाई, ‘सड़क, संपर्क एवं आधारभूत संरचना’ में श्रितिका रावत, ‘प्रौद्योगिकी एवं सुशासन’ में प्रियांशु सजवाण, ‘पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था’ में दृष्टि चौहान तथा ‘महिला एवं बाल कल्याण’ में अनुष्का नेगी विजेता रहे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ अभियान में प्रदेश के 2 लाख 67 हजार 744 विद्यार्थियों ने निबंध, विचार और सुझाव साझा किए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी भागीदारी से स्पष्ट है कि प्रदेश का युवा राज्य के भविष्य और विकास को लेकर जागरूक है। विद्यार्थियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, सड़क, वन एवं पर्यावरण, खेल, पलायन, स्वरोजगार, स्टार्टअप और गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने सहित विभिन्न विषयों पर सुझाव दिए हैं।
धामी ने कहा कि सरकार और युवाओं के बीच संवाद निरंतर बना रहना चाहिए। शासन के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और विद्यार्थियों के बीच हुए संवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन और युवाओं के बीच इस प्रकार का वैचारिक मंथन नई सोच और बेहतर नीति-निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को एआई, रोबोटिक्स, डिजिटल तकनीक और आधुनिक मांग आधारित कौशल से जोड़ना समय की आवश्यकता है। सरकार युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के साथ उद्यमिता और स्वरोजगार के माध्यम से रोजगार सृजन के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव रखे। उत्तरकाशी के अनमोल प्रमार ने स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी ग्राम स्तर तक पहुंचाने और विद्यालयों में करियर काउंसलिंग के साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। रुद्रपुर की वैष्णवी ने वरिष्ठ नागरिकों के ज्ञान एवं अनुभवों को संरक्षित करने के लिए ‘नॉलेज बैंक’ विकसित करने की बात कही। कालसी की कसिस ने औषधीय वनस्पतियों की संभावनाओं का उपयोग कर उत्तराखंड की वैश्विक पहचान बनाने का सुझाव दिया। वहीं, अल्मोड़ा के भरत ने पर्यटन क्षेत्र में वैश्विक स्तर की श्रेष्ठ प्रथाओं का अध्ययन कर उन्हें राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने का सुझाव दिया।


