उत्तराखंड में सरकारी व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। कई मामलों में पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज कर लेती है, जबकि कुछ संवेदनशील मामलों में कार्रवाई में देरी देखने को मिलती है। ऐसा ही एक मामला राजधानी देहरादून से सामने आया है, जहां एक मूक-बधिर युवती के लापता होने के करीब ढाई महीने बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
जानकारी के अनुसार, 20 वर्षीय मूक-बधिर युवती मीरा उर्फ रानी 22 मार्च 2026 को सर्वे चौक स्थित वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) से अचानक लापता हो गई थी। युवती को एक दिन पहले, 21 मार्च को थाना नेहरू कॉलोनी पुलिस द्वारा अस्थायी आश्रय के लिए वन स्टॉप सेंटर लाया गया था।
बताया जा रहा है कि 22 मार्च की शाम करीब 6:30 बजे युवती आश्रय गृह से कहीं चली गई और उसके बाद वापस नहीं लौटी। लंबे समय तक युवती का कोई पता नहीं चलने पर वन स्टॉप सेंटर प्रशासन ने अब डालनवाला थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
डालनवाला थाना प्रभारी संतोष सिंह कुंवर ने बताया कि केंद्र प्रशासक माया नेगी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कर ली है और युवती की तलाश शुरू कर दी गई है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि युवती के लापता होने के करीब ढाई महीने बाद एफआईआर क्यों दर्ज की गई। ऐसे संवेदनशील मामले में कार्रवाई में हुई देरी कई सवाल खड़े कर रही है।


