नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में एक बार फिर कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक और सरकारी सूत्रों के अनुसार, संसद के मानसून सत्र से पहले मंत्रिपरिषद में बदलाव और विस्तार किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों का कहना है कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों के कामकाज की समीक्षा के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि जिन मंत्रालयों में कार्यों की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही या जहां सुधार की जरूरत महसूस की गई है, वहां नए नेतृत्व को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों के साथ की गई समीक्षा बैठक को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में कामकाज को और प्रभावी बनाना बताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, संभावित फेरबदल के जरिए सरकार और बीजेपी के नए संगठनात्मक ढांचे के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की भी कोशिश हो सकती है। इसके तहत कुछ नेताओं को सरकार से संगठन में और कुछ नए चेहरों को संगठन से सरकार में जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
चर्चा यह भी है कि मंत्रिपरिषद में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व देने के साथ-साथ महिलाओं, पिछड़े वर्गों और सहयोगी दलों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार कुछ वरिष्ठ नेताओं का कार्यभार कम करने और कई मंत्रालय संभाल रहे मंत्रियों के विभागों का पुनर्वितरण करने पर भी विचार कर सकती है, ताकि प्रत्येक मंत्रालय को अधिक केंद्रित नेतृत्व मिल सके।
संभावित नए चेहरों को लेकर जिन नामों की चर्चा है, उनमें श्रीकांत शिंदे, अनुराग ठाकुर, शक्तिकांत दास, अरुण गोविल, नीतीश कुमार और राघव चड्ढा शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं, कुछ रिपोर्टों में धर्मेंद्र प्रधान और हरदीप सिंह पुरी के विभागों में बदलाव की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि, इन सभी नामों और संभावित बदलावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में अंतिम फैसला सरकार की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।


