उत्तराखंड हाईकोर्ट ने छह साल से न्याय के लिए भटक रहे एक प्राथमिक शिक्षक की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। शिक्षक ने विभागीय अनियमितताओं को उजागर करने के बाद खुद और अपने परिवार के आर्थिक, मानसिक व सामाजिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। वर्ष 2019 में राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक सुनवाई नहीं होने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा। वहीं, हाईकोर्ट के पहले आदेश के बाद भी आयोग की ओर से कार्रवाई नहीं की गई तो शिक्षक को अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग के सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने सचिव से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है।
याचिका के अनुसार, देव कुमार जैन राजकीय प्राथमिक विद्यालय पिण्डकी में सहायक अध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत छात्र-छात्राओं के दाखिले में कथित डबलिंग, वित्तीय अनियमितताओं और छात्रवृत्ति से जुड़ी गड़बड़ियों के संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्राचार कर शिकायत की थी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि शिकायतों की जांच में अनियमितताएं सही पाए जाने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय विभागीय स्तर पर कथित मिलीभगत से उनका उत्पीड़न शुरू कर दिया गया। आरोप है कि उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान करने के साथ सामाजिक स्तर पर भी प्रताड़ित किया गया। इतना ही नहीं, उनका वेतन भी रोक दिया गया।
इन परिस्थितियों से परेशान होकर शिक्षक ने वर्ष 2019 में राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन करीब छह वर्ष बीत जाने के बाद भी शिकायत पर कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने फरवरी 2026 में हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने उस याचिका का निस्तारण करते हुए मानवाधिकार आयोग को शिक्षक की शिकायत का दो माह के भीतर निस्तारण करने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि निर्धारित अवधि बीतने के कई महीने बाद भी आयोग ने न तो शिकायत पर सुनवाई की और न ही हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया। आखिरकार शिक्षक को न्यायालय के आदेश की अवहेलना के खिलाफ दोबारा हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी। अब हाईकोर्ट ने मामले में आयोग के सचिव से जवाब तलब किया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद लंबे समय से लंबित शिकायत पर कार्रवाई की उम्मीद जगी है।


