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विजय दिवस… शहीदों की वीरता से गूंजा उत्तराखंड

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देहरादून/हल्द्वानी: 16 दिसंबर को भारत-पाकिस्तान 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की करारी हार और 93 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण की याद में हर साल विजय दिवस मनाया जाता है। इस युद्ध में उत्तराखंड के 248 जवान शहीद हुए और 78 सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए थे। उत्तराखंड के 74 वीर जवानों को उनकी बहादुरी के लिए वीरता पदक से सम्मानित किया गया।

उत्तराखंड के लगभग हर जिले ने इस युद्ध में अपने लाल खोए थे: पिथौरागढ़ से 51, देहरादून 42, चमोली 31, बागेश्वर 24, अल्मोड़ा 23, लैंसडाउन और पौड़ी 19-19, नैनीताल 12, टिहरी गढ़वाल 10, चंपावत आठ और रुद्रप्रयाग तथा उत्तरकाशी से एक-एक जवान शहीद हुए। इसके अलावा ऊधम सिंह नगर के वीर सैनिकों ने भी इस युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी।

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इस अवसर पर राज्यपाल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे भगत सिंह कोश्यारी समेत अन्य नेताओं ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि 1971 के युद्ध में उत्तराखंड के सैनिकों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और भीषण युद्ध हालात के बावजूद दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया। इसी बहादुरी का नतीजा था कि पाकिस्तान को करारी हार झेलनी पड़ी और बांग्लादेश के रूप में एक नया राष्ट्र अस्तित्व में आया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को वीरभूमि यूं ही नहीं कहा जाता; यहां की लोकसंस्कृति, लोकगीत और कहानियां आज भी उन वीर सपूतों की शौर्य गाथाओं से भरी पड़ी हैं।

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राज्यपाल गुरमीत सिंह ने देहरादून गढ़ी कैंट स्थित चीड़ बाग शौर्य स्थल पर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि यह युद्ध भारत के सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है और शहीदों तथा उनके परिवारों की देखभाल हमारी सार्वजनिक जिम्मेदारी है।

हल्द्वानी के नैनीताल रोड शहीद पार्क में पूर्व मुख्यमंत्री व महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भी 1971 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि 93 हजार पाकिस्तान सैनिकों का सरेंडर और बांग्लादेश का निर्माण भारतीय सेना की अद्वितीय वीरता का प्रमाण है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

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इस अवसर ने उत्तराखंड के वीर जवानों के बलिदान, शौर्य और मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा को फिर से याद दिलाया, और आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और साहस की प्रेरणा के रूप में एक अमर संदेश छोड़ा।

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हिल दर्पण डेस्क

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