उत्तराखंड में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों के तबादलों व तैनाती को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। दोनों पक्षों को दो सप्ताह के भीतर प्रति शपथ-पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश में पिछले करीब 12 वर्षों से अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के तबादले और तैनाती सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और कैडर नियमों के अनुरूप नहीं किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों के विवरण को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
याचिका में कहा गया है कि अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली, 1968 के तहत अधिकारियों की संपत्तियों के विवरण की जांच के लिए प्रभावी प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है। संपत्ति विवरण दाखिल करने की व्यवस्था महज औपचारिकता बनकर रह गई है।
हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र और राज्य सरकार को निर्धारित अवधि में अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।



