उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अब सियासी हलचल के साथ निर्वाचन आयोग की तैयारियां भी तेज होने लगी हैं। राजनीतिक दल जहां चुनावी मुद्दों को लेकर मैदान तैयार करने में जुटे हैं, वहीं निर्वाचन आयोग ने भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपना कैलेंडर तैयार कर लिया है। एक अक्तूबर से प्रदेश में ईवीएम और वीवीपैट की प्रथम चरण की जांच शुरू होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से यह प्रक्रिया जिलावार कराई जाएगी।
चुनाव की तैयारियों के तहत पहले चरण में सभी ईवीएम और वीवीपैट की जांच की जाएगी। इसके साथ ही मतदान केंद्रों पर चुनाव के दौरान जरूरी सुविधाओं और व्यवस्थाओं का भी आकलन किया जाएगा। ईवीएम-वीवीपैट की जांच पूरी होने के बाद निर्वाचन आयोग की टीमें प्रदेशभर के मतदान केंद्रों का भौतिक सत्यापन करेंगी। इस दौरान यह देखा जाएगा कि मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
मतदान केंद्रों के निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों को चिह्नित कर उन्हें समय रहते दूर कराया जाएगा, ताकि विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो। आयोग का फोकस मतदान केंद्रों की व्यवस्थाओं के साथ ही अधिक से अधिक लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करने पर भी रहेगा। इसके लिए स्वीप गतिविधियों का भी खाका तैयार किया जाएगा।
वहीं, प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया भी जारी है। दावे और आपत्तियों के निस्तारण का काम 11 सितंबर तक पूरा किया जाना है। इसके बाद 15 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। अंतिम सूची जारी होने के बाद प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या भी स्पष्ट हो जाएगी।
मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद चुनावी तैयारियां और रफ्तार पकड़ेंगी। अक्तूबर से ईवीएम-वीवीपैट की जांच और मतदान केंद्रों के भौतिक सत्यापन के साथ आयोग विधानसभा चुनाव की तैयारियों को जमीन पर उतारना शुरू कर देगा। ऐसे में आने वाले दिनों में उत्तराखंड में राजनीतिक गतिविधियों के साथ चुनावी तैयारियों का माहौल भी लगातार गरमाने के आसार हैं।


