उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के लागू होने को आज एक वर्ष पूरा हो गया है। इस अवसर पर टैक्स बार एसोसिएशन, रामनगर के अध्यक्ष एवं हाईकोर्ट अधिवक्ता पूरण चंद्र पांडे ने इसे भारतीय संविधान की आत्मा को साकार करने वाला कानून बताया।
उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता संविधान के अनुच्छेद 44 की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे राज्य में न्याय अब धर्म या जाति नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों के आधार पर सुनिश्चित हो रहा है।
वहीं टैक्स बार एसोसिएशन के उपसचिव मनु अग्रवाल ने कहा कि UCC ने खासतौर पर महिलाओं को सम्मान और समान अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे पारिवारिक और वैवाहिक कानूनों में कानूनी असमानताएँ दूर हुई हैं।
अधिवक्ताओं ने बताया कि डिजिटल प्रक्रिया, पारदर्शिता और सरल न्याय प्रणाली के कारण समाज ने इस कानून को स्वीकार किया है। हालांकि कुछ प्रशासनिक चुनौतियाँ सामने आई हैं, लेकिन संवाद और सुधार के जरिए इन्हें दूर किया जा सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तराखंड का UCC मॉडल भविष्य में पूरे देश के लिए मार्गदर्शक साबित होगा।


