उत्तराखण्ड कुमाऊं जन मुद्दे नैनीताल हिल दर्पण

फिर डोली धरती… उत्तराखंड का ये जिला रहा केंद्र

खबर शेयर करें -

उत्तराखंड में एक बार फिर धरती हिली है। रविवार दोपहर प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। झटके लगते ही लोग अपने घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों की ओर दौड़ पड़े।

जानकारी के अनुसार, थराली और बागेश्वर की सीमा से लगे क्षेत्रों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड के स्कूल में छात्रा से शर्मनाक हरकत!...शिक्षक और एनसीसी अधिकारी पर गंभीर आरोप

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 9 नवंबर (रविवार) को दोपहर 2 बजकर 40 मिनट 4 सेकंड पर 3.6 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र बिंदु बागेश्वर जिला था, और यह जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। झटके चमोली जिले के थराली और ग्वालदम इलाके में भी महसूस किए गए।

यह भी पढ़ें 👉  धामी सरकार का बड़ा तोहफा... 488 एकल महिलाओं के खातों में भेजे 2.76 करोड़ रुपये

थराली क्षेत्र पहले ही आपदाओं का दर्द झेल चुका है। ऐसे में भूकंप के इन झटकों ने लोगों की चिंता और भय को एक बार फिर बढ़ा दिया है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में अगले 6 दिन भारी पड़ेंगे!... मौसम विभाग का बड़ा अलर्ट, देखें अपडेट

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि “भूकंप का केंद्र बागेश्वर जिले में था और ग्वालदम क्षेत्र में इसका असर ज्यादा महसूस किया गया। हालांकि, भूकंप से किसी प्रकार की क्षति की कोई सूचना नहीं है।”

Ad
हिल दर्पण डेस्क

हिल दर्पण डेस्क

About Author

"हिल दर्पण" उत्तराखण्ड तथा देश-विदेश की ताज़ा ख़बरों व समाचारों का एक डिजिटल माध्यम है। अपने विचार अथवा अपने क्षेत्र की ख़बरों को हम तक पहुंचानें हेतु संपर्क करें। धन्यवाद! Email: [email protected]

You may also like

उत्तराखण्ड धर्म/संस्कृति बागेश्वर

उत्तराखंड को माना जाता है शिवजी का ससुराल, यह है मान्यता      

खबर शेयर करें -उत्तराखंड में कई प्राचीन शिव मंदिर हैं जिनके बारे में मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी
उत्तराखण्ड देहरादून मौसम

*मौसम विभाग की चेतावनी- पहाड़ों में होगी बारिश और बर्फबारी, कोहरे की आगोश में रहेंगे यह जिले*

खबर शेयर करें -देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम बदलने को तैयार है। इस बीच उच्च हिमालयी क्षेत्रों में