उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन के भीतर उठापटक बढ़ती नजर आ रही है। प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर लंबे समय से जारी इंतजार के बीच अब पार्टी प्रभारी कुमारी सैलजा के एक निर्देश ने संगठन में नई चर्चा छेड़ दी है।
कुमारी सैलजा ने पार्टी जिलाध्यक्षों को लेकर स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जो नेता विधानसभा चुनाव में दावेदारी करना चाहते हैं, उन्हें संगठनात्मक पद छोड़ना होगा। इस फैसले के बाद उन जिलाध्यक्षों की चिंता बढ़ गई है, जो लंबे समय से अपने क्षेत्रों में चुनावी तैयारियों के साथ संगठन को भी संभाल रहे हैं।
कांग्रेस के कई जिला अध्यक्ष अब असमंजस में हैं कि वे संगठन की जिम्मेदारी जारी रखें या चुनावी मैदान में उतरने के लिए पद छोड़ दें। पार्टी के अंदर कुछ नेता इसे चुनावी रणनीति के लिहाज से जरूरी कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे अचानक लिया गया फैसला मानकर सवाल उठा रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस में पहले से ही संगठन विस्तार को लेकर स्थिति साफ नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की नियुक्ति के कई महीने बाद भी प्रदेश कार्यकारिणी को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। इसके चलते पार्टी के भीतर पदों और जिम्मेदारियों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं।
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटा है, लेकिन अंदरूनी मतभेद और नेताओं की अलग-अलग प्राथमिकताएं पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस हाईकमान जिलाध्यक्षों को लेकर अपने फैसले पर क्या कदम उठाता है और संगठन में आगे किस तरह का बदलाव देखने को मिलता है।


