उत्तराखंड में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले ने आक्रोश पैदा कर दिया है। घटना से नाराज लोगों ने उस होटल में तोड़फोड़ कर विरोध जताया, जहां वारदात होने का आरोप है। ऋषिकेश में सामने आए इस शर्मनाक कृत्य में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, होटल प्रबंधन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आती जा रही है। पुलिस फरार आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने एम्स ऋषिकेश पहुंचकर पीड़िता और उसके परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्याय व सुरक्षा का भरोसा दिलाया। उन्होंने एसपी देहात जया बलूनी और कोतवाली प्रभारी यशपाल सिंह बिष्ट से फोन पर घटना की जानकारी ली। कंडवाल ने पुलिस अधिकारियों को फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश तेज करने और मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कुसुम कंडवाल ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया के जरिए नाबालिग छात्रा को ऋषिकेश बुलाना, बहला-फुसलाकर होटल ले जाना और कथित तौर पर नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म करना प्रथम दृष्टया सुनियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की।
मामला पुराने रेलवे स्टेशन के समीप चेला चेतराम मार्ग स्थित होटल से जुड़ा है। पुलिस जांच में होटल की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि होटल में कमरा उपलब्ध कराने से पहले पहचान संबंधी दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की जाती थी और कथित तौर पर अतिरिक्त रकम लेकर कमरे दिए जाते थे। कुछ मामलों में अधूरे पहचान दस्तावेजों के आधार पर कमरे उपलब्ध कराने की बात भी जांच में सामने आई है।
होटल की सीसीटीवी व्यवस्था भी पुलिस जांच के दायरे में है। जांच के दौरान कैमरे बंद होने की बात सामने आई है। इसके पीछे बिजली नहीं होने का कारण बताया गया, लेकिन पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सीसीटीवी किन परिस्थितियों में बंद हुए और क्या इन्हें जानबूझकर बंद किया गया था। होटल में कथित अनैतिक गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
महिला आयोग ने होटल संचालकों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर प्रदेश के सभी होटलों में कम से कम तीन माह का सीसीटीवी बैकअप अनिवार्य करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे पुलिस, महिला आयोग और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को संदिग्ध गतिविधियों की जांच में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि वैध पहचान पत्र और आयु सत्यापन के बिना नाबालिगों को कमरा देने वाले होटल संचालकों को चिह्नित किया जाए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर पॉक्सो एक्ट समेत अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की गिरफ्तारी के साथ होटल मालिक और मैनेजर की भूमिका तथा होटल में हुई कथित अनियमितताओं की भी जांच कर रही है।


