सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट्स, साइबर फ्रॉड और गलत जानकारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब सरकार सख्त कदम उठाने पर विचार कर रही है। इसी दिशा में एक संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि सोशल मीडिया यूजर्स के लिए केवाईसी (KYC) अनिवार्य किया जाए। इस प्रस्ताव का उद्देश्य फेक प्रोफाइल्स पर रोक लगाना और ऑनलाइन अपराधों को कम करना है।
क्या है प्रस्ताव?
संसदीय पैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और डेटिंग प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स की पहचान सत्यापित करने के लिए केवाईसी सिस्टम लागू किया जा सकता है। अगर यह नियम लागू होता है, तो यूजर्स को अकाउंट बनाने या इस्तेमाल करने के लिए आधार कार्ड या किसी अन्य सरकारी पहचान पत्र के जरिए अपनी पहचान प्रमाणित करनी पड़ सकती है।
क्यों जरूरी माना जा रहा है यह कदम?
आज के समय में सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फर्जी अकाउंट्स मौजूद हैं। इनका इस्तेमाल धोखाधड़ी, ऑनलाइन उत्पीड़न, महिलाओं और बच्चों को परेशान करने और भ्रामक जानकारी फैलाने जैसे गलत कामों के लिए किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे अकाउंट्स साइबर क्राइम को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे समाज पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
क्या बदल सकता है?
अगर केवाईसी नियम लागू होता है, तो इसके कई प्रभाव देखने को मिल सकते हैं:
- फर्जी अकाउंट बनाना कठिन हो जाएगा
- गलत गतिविधियों में शामिल लोगों को पहचानना और ट्रैक करना आसान होगा
- ऑनलाइन फ्रॉड और हैरेसमेंट के मामलों में कमी आ सकती है
सरकार का मानना है कि जब यूजर्स की असली पहचान प्लेटफॉर्म से जुड़ी होगी, तो वे जिम्मेदारी से व्यवहार करेंगे और गलत गतिविधियों से बचेंगे। यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव है, जिसे संसदीय समिति ने सुझाया है। इसे लागू करने से पहले सरकार को कई स्तरों पर विचार-विमर्श और कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।


