उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 के चर्चित उत्तरकाशी सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए तीन अभियुक्तों को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी अपीलें खारिज कर दी हैं। न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने सत्र न्यायालय, उत्तरकाशी के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है।
अदालत ने मनीष अवस्थी, आशीष बिजल्वाण और अजय भट्ट को गैंगरेप के अपराध में दी गई 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखा। अभियुक्तों ने दलील दी थी कि उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक या वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं तथा पीड़िता के बयान में भी विरोधाभास हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने माना कि दुष्कर्म के मामलों में पीड़िता का विश्वसनीय और भरोसेमंद बयान स्वयं में पर्याप्त साक्ष्य हो सकता है।
खंडपीठ ने कहा कि पीड़िता ने घटना का स्पष्ट और क्रमबद्ध विवरण दिया है, जिसे अन्य गवाहों और उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से समर्थन मिलता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चिकित्सकीय रिपोर्ट में चोटों या वीर्य के निशान न मिलने मात्र से अभियोजन का मामला कमजोर नहीं होता, विशेषकर तब जब पीड़िता घटना के बाद स्नान कर चुकी हो और उस समय मासिक धर्म की अवस्था में रही हो।
मामले में राज्य सरकार ने विजय शंकर नौटियाल को गैंगरेप, बंधक बनाने और धमकी देने के आरोपों से बरी किए जाने को चुनौती दी थी। लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्यों से उसकी सामूहिक दुष्कर्म में सक्रिय भागीदारी सिद्ध नहीं होती। अदालत ने माना कि उसके खिलाफ केवल मारपीट का आरोप साबित हुआ था, जिसके लिए निचली अदालत पहले ही उसे दोषी ठहरा चुकी है।
इन निष्कर्षों के साथ हाईकोर्ट ने दोषी अभियुक्तों की सभी आपराधिक अपीलें खारिज कर दीं और राज्य सरकार की अपील भी निरस्त करते हुए सत्र न्यायालय, उत्तरकाशी के 21 मई 2018 के फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा।


