देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। उन्होंने परेड की सलामी ली और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सम्मानित किया।
इस बार की पासिंग आउट परेड भारतीय सेना के इतिहास में विशेष महत्व रखती है, क्योंकि पहली बार एनडीए से प्रशिक्षित महिला कैडेट्स ने अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर सेना में अधिकारी के रूप में कदम रखा है। वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एनडीए में महिलाओं के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ था, और यह बैच उसी ऐतिहासिक बदलाव की पहली सफल कड़ी बनकर सामने आया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस उपलब्धि को देश में बदलते समय और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह क्षण केवल सैन्य इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि भारत के विकसित हो रहे नेतृत्व मॉडल का भी प्रतीक है।
उन्होंने नव-नियुक्त अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि नेतृत्व केवल आदेश देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ अपनी टीम को आगे बढ़ाने की भावना शामिल होती है। राष्ट्रपति ने कहा कि अब देश की सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उनके कंधों पर है, जिसे उन्हें पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाना होगा।
राष्ट्रपति ने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में तकनीक-आधारित युद्ध और नई चुनौतियों के लिए सेना को लगातार तैयार रहना होगा। उन्होंने अधिकारियों से जीवनभर सीखते रहने और अपने नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि एक सच्चे सैन्य अधिकारी की पहचान केवल नेतृत्व क्षमता से नहीं होती, बल्कि अपने जवानों के प्रति एक संरक्षक की तरह व्यवहार करने से होती है। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति ने सभी कैडेट्स, उनके परिजनों, प्रशिक्षकों और मित्र देशों से आए कैडेट्स को बधाई दी। उन्होंने आईएमए के आदर्श वाक्य “वीरता और विवेक” को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।


