उत्तराखंड में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक बारिश और ओलावृष्टि के कारण ठंड बढ़ने लगी है। मौसम विज्ञान केंद्र ने शनिवार को भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। वहीं, 3500 मीटर या इससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के नौ जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है। मौसम में आए बदलाव से तापमान में गिरावट आने और ठंड का असर बढ़ने की संभावना है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, समुद्री क्षेत्रों से आ रही नमी और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण प्रदेश में बादल, बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बन रही है। इन मौसमी प्रणालियों का असर ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के रूप में भी दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि मानसून की विदाई के बाद भी वातावरण में नमी बनी हुई है।
मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने बताया कि अक्तूबर में मानसून की विदाई का मतलब यह नहीं है कि बारिश पूरी तरह बंद हो जाएगी। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने और पर्याप्त नमी मिलने पर उत्तराखंड में कम समय के भीतर तेज बारिश, ओलावृष्टि और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। जलवायु परिवर्तन के चलते तापमान, नमी और वर्षा के स्वरूप में होने वाले बदलाव भी मौसम संबंधी जोखिमों को प्रभावित कर सकते हैं।



