उत्तराखंड ने भारत की न्यायिक और कानून प्रवर्तन प्रणाली के आधुनिकीकरण में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 के राष्ट्रीय कार्यान्वयन में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने 93.46 के उत्कृष्ट स्कोर के साथ देश में शीर्ष स्थान हासिल किया। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के नवीनतम CCTNS/ICJS डैशबोर्ड के अनुसार, हरियाणा, असम, सिक्किम और मध्य प्रदेश क्रमशः दूसरे से पांचवें स्थान पर हैं।
इस उपलब्धि में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और ‘मिशन-मोड’ क्रियान्वयन का अहम योगदान रहा। उन्होंने नए कानून—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शासन के उच्च अधिकारियों से लेकर फील्ड अधिकारियों तक निरंतर समीक्षा की।
उत्तराखंड की सफलता का मुख्य आधार ‘वन डेटा, वन एंट्री’ प्रणाली है, जिसमें पुलिस, ई-कोर्ट, ई-जेल, ई-अभियोजन और ई-फॉरेंसिक के बीच डेटा का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित किया गया है। एक बार डेटा दर्ज होने के बाद वह सभी संबंधित विभागों को तुरंत उपलब्ध हो जाता है, जिससे मुकदमों के निस्तारण में तेजी आई और पारदर्शिता बढ़ी। ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के माध्यम से अपराध स्थल की वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित संग्रहण भी किया जाता है।
राज्य के 23,000 से अधिक पुलिस कर्मियों को नए कानूनों और तकनीकी सुदृढ़ीकरण का प्रशिक्षण दिया गया। वर्चुअल अदालती सुनवाई और फॉरेंसिक मोबाइल वैन की उपलब्धता ने न्यायिक प्रक्रिया को और तेज और पारदर्शी बनाया। उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता और IGP (अपराध एवं कानून व्यवस्था) सुनील कुमार मीणा ने बताया कि रीयल-टाइम डेटा एंट्री और तकनीकी बुनियादी ढांचे में राज्य ने देश में नया मानक स्थापित किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उच्च स्तरीय बैठकों में उत्तराखंड की इस कुशलता की सराहना की। इस समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ उत्तराखंड अब पूरे देश के लिए ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का आदर्श मॉडल बनकर उभरा है।


